जीरो वैकेंसी वाले जिलों में भी पद खाली, रिक्त हजारों पदों पर होने चाहिए तबादले
जिन परिषदीय प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों का तबादला करने से इनकार कर दिया गया था, वहां शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली हैं। आरटीआई के तहत रिक्त पदों की सूचना मिलने के बाद तबादले से वंचित शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका की है। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल की ओर से 26 जून को परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत 16614 शिक्षकों का अंतर जनपदीय तबादला किया गया था। सरकार ने इसके लिए गाइडलाइन तय की थी कि जिले में स्वीकृत पदों के सापेक्ष दस फ़ीसदी ट्रांसफ़र होंगे।
हाईकोर्ट में याचिका करने वाले मेरठ के शिक्षक हिमांशु राणा का कहना है कि 11 जिलों में ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक स्कूलों में शून्य पद दिखाकर तबादले नहीं किए गए थे । गौतमबुद्धनगर में शून्य पद दिखाए गए थे लेकिन आरटीआई से मिली सूचना के मुताबिक सहायक अध्यापकों के 655 पद रिक्त दिखाया गया। वहां स्वीकृत पद 2047 हैं लिहाजा दस प्रतिशत के हिसाब से 200 पदों पर ट्रांसफ़र होने चाहिए थे। मेरठ में भी 389 पद रिक्त हैं। मुज़फ़्फ़रनगर में भी 720 पद रिक्त हैं और कुल स्वीकृत पद 3194 के सापेक्ष लगभग 319 तबादले होने चाहिए थे।
याचिका करने वाले हिमांशु का कहना है कि शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने विधानसभा में बताया था कि प्राथमिक स्कूलों में 85, 152 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक के 41,338 पद रिक्त हैं। शिक्षामित्र व अनुदेशकों को मिलाकर छात्र- शिक्षक अनुपात बराबर किया जा रहा है। जबकि उसके कुछ दिन बाद ही शिक्षामित्रों को शिक्षक न मानते हुए संविदाकर्मी माना गया है। ऐसे में शिक्षकों के रिक्त हजारों पदों पर ट्रांसफ़र व नई भर्ती करनी चाहिए।
आरटीआई के तहत मांगी गई जन सूचनाओं



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