इस जनपद के परिषदीय स्कूलों की हालत पिछड़े जिलों से भी बदतर, UP में 74वीं रैंक आई
गौतमबुद्ध नगर के परिषदीय स्कूलों की हालत उत्तर प्रदेश के पिछड़े जिलों से भी बुरी है। कासगंज और फर्रुखाबाद जैसे जिलों को हाईटेक शहर गौतमबुद्ध नगर से पीछे माना जाता है, लेकिन परिषदीय स्कूलों के कायाकल्प के मामले में आगे निकल गए हैं। हाल ही में ऑपरेशन कायाकल्प फेस-5 की रैंकिंग जारी हुई है। जिसमें गौतमबुद्ध नगर पूरे उत्तर प्रदेश में 74वें नंबर पर है। यानी पूरे उत्तर प्रदेश में सेकंड लास्ट नंबर गौतमबुद्ध नगर जिला आया है। वहीं, गोरखपुर की हालत गौतमबुद्ध नगर से भी बुरी है। वह सबसे फिसड्डी यानी 75वें में नंबर पर है।
कायाकल्प केवल 73 प्रतिशत हुआ
रिपोर्ट की मानें तो गौतमबुद्ध नगर के परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प केवल 73 प्रतिशत हो पाया है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 151 परिषदीय स्कूल है। जिनमें हजारों बच्चे पढ़ते हैं। जानकारी के मुताबिक बालिका शौचालय के मामले में जिले के परिषदीय विद्यालय काफी पीछे हैं। यह अपने आप में काफी चिंताजनक विषय है। कुल 19 बिंदुओं पर परिषदीय विद्यालय का कायाकल्प तय किया जाता है।
कुछ महत्वपूर्ण बिंदु
पीने का पानी
रनिंग वॉटर कनेक्शन
बालक शौचालय
बालिका शौचालय
दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय
हैंडवॉश यूनिट
टाइल्स युक्त क्लास
ब्लैक बोर्ड
ग्रीन बोर्ड
डेस्क और बेंच
रसोई घर
पक्के फर्श और छत
रंगाई पुताई
चार दीवारी
रेलिंग युक्त रैंप
सुरक्षित वायरिंग
बिजली व्यवस्था
अबकी बार टॉप 5 में शामिल होंगे परिषदीय विद्यालय
गौतमबुद्ध नगर की बेसिक शिक्षा अधिकारी ऐश्वर्या लक्ष्मी का कहना है, "यह रिपोर्ट जुलाई महीने से पहले भेजी गई थी। अब जिले के परिषदीय विद्यालयों को संवारने के लिए कार्य किया जा रहा है। कुल 19 बिंदुओं पर स्कूल में विकास कार्य कराकर रैंकिंग को सुधारा जाएगा। अबकी बार गौतमबुद्ध नगर के परिषदीय टॉप 5 में शामिल होंगे।"


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